बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
मूल पाठ
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा-
भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥७॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनेक पुराण, वेद और [तन्त्र] शास्त्रसे सम्मत तथा जो रामायणमें वर्णित है और कुछ अन्यत्रसे भी उपलब्ध श्रीरघुनाथजीकी कथाको तुलसीदास अपने अन्त:करणके सुखके लिये अत्यन्त मनोहर भाषारचनामें विस्तृत करता है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 18 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
English explanation
That which is approved by various Puranas, Vedas, and Agamas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नानापुराणनिगमागमसम्मतं | विविध पुराणों, वेदों और आगमों द्वारा सम्मत | approved by various Puranas, Vedas, and Agamas |
| यद् | जो | that which |
2रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
English explanation
Which is related in the Ramayana, with some material also drawn from other sources—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामायणे | रामायण में | in the Ramayana |
| निगदितं | कहा गया | related |
| क्वचिदन्यतोऽपि | कहीं-कहीं अन्य स्रोतों से भी | in places, from other sources too |
3स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा-
English explanation
For the joy of his own heart, Tulsi unfolds the story of Raghunatha—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वान्तःसुखाय | अपने अंतःकरण के सुख के लिए | for the joy of his own heart |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| रघुनाथगाथा | श्रीराम की कथा | the story of Lord Rama |
4भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥७॥
English explanation
He composes its exceedingly beautiful poetic rendering in the vernacular.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति | लोकभाषा में अत्यंत सुंदर रचना का विस्तार करते हैं | composes an exceedingly beautiful rendering in the vernacular |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 18
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।