बालकाण्ड · दोहा 28 (क) · दोहा/सोरठा
सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।
सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।
उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।
कृपालु राम इस मूर्ख सेवक के प्रेम और इच्छा का मान रखेंगे।
English explanation
Compassionate Rama will honor this foolish servant’s love and desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सठ | मूर्ख | foolish |
| सेवक | सेवक | servant |
| की | की | of |
| प्रीति | प्रेम | love |
| रुचि | इच्छा | desire |
| रखिहहिं | मान रखेंगे | will honor |
| राम | भगवान राम | Rama |
| कृपालु | दयालु | compassionate |
2 उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।
जिन्होंने पत्थरों को जल पर चलनेवाले साधन बनाया और वानरों तथा भालुओं को सुबुद्धि मंत्री बनाया।
English explanation
He made stones into conveyances upon water, and monkeys and bears into wise counselors.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपल | पत्थरों को | stones |
| किए | बना दिया | made into |
| जलजान | जल पर चलनेवाले साधन | conveyances upon water |
| जेहिं | जिन्होंने | he who |
| सचिव | मंत्री | counselors |
| सुमति | अच्छी बुद्धिवाले | wise |
| कपि | वानरों को | monkeys |
| भालु | भालुओं को | bears |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 28 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
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