बालकाण्ड · दोहा 28 (ख) · दोहा/सोरठा
हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।
हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।
साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।
मैं भी उनका सेवक कहलाता हूँ, और सब ऐसा कहते हैं; राम यह उपहास सहते हैं।
English explanation
I too am called his servant, and everyone says so; Rama bears this mockery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हौहु | मैं भी | I too |
| कहावत | कहलाता हूँ | am called |
| सबु | सब लोग | everyone |
| कहत | कहते हैं | says |
| राम | भगवान राम | Rama |
| सहत | सहते हैं | bears |
| उपहास | हँसी या उपहास | mockery |
2 साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।
स्वामी तो सीता के नाथ राम जैसे हैं और सेवक तुलसीदास है!
English explanation
The master is one such as Rama, Sita’s lord, and the servant is Tulsidas!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साहिब | स्वामी | the master |
| सीतानाथ | सीता के पति राम | Rama, Sita’s husband |
| सो | ऐसे | such as he |
| सेवक | सेवक | the servant |
| तुलसीदास | कवि तुलसीदास, स्वयं वक्ता | Tulsidas, the poet speaking here |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 28 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।