बालकाण्ड · दोहा 159 (क) · दोहा/सोरठा
निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।
निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।
बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.159 · पुस्तक पृ. 164, 164
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।
हे समझदार, सुनो: रात भयावह है, वन घना है और रास्ता नहीं सूझता।
English explanation
Listen, discerning one: the night is fearsome, the forest dense, and no path is apparent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसा | रात | night |
| घोर | भयावह | fearsome |
| गम्भीर | घना; गहरा | dense; deep |
| बन | वन | forest |
| पंथ | रास्ता | path |
| न | नहीं है; नहीं सूझता | is absent; is not apparent |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सुजान | हे समझदार | O discerning one |
2बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।
यह स्थिति जानकर आज यहीं ठहरो; सुबह होने पर चले जाना।
English explanation
Knowing these circumstances, stay here tonight; leave when morning comes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बसहु | ठहरो | stay |
| आजु | आज | today; tonight |
| अस | ऐसा | thus; these circumstances |
| जानि | जानकर | knowing |
| तुम्ह | तुम | you |
| जाएहु | चले जाना | depart |
| होत | होने पर | when it comes |
| बिहान | सुबह | morning |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 159 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.159
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 164
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।