बालकाण्ड · दोहा 159 (ख) · दोहा/सोरठा
तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.159 · पुस्तक पृ. 164, 164
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
तुलसी कहते हैं: जैसी होनहार होती है, वैसी ही सहायता मिलती है।
English explanation
Tulsidas says: As the destined outcome is, so is the assistance one receives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| जसि | जैसी | as; of whatever kind |
| भवतब्यता | होनहार; जो होना नियत है | destiny; what is destined to happen |
| तैसी | वैसी | of that same kind |
| मिलइ | मिलती है | is received |
| सहाइ | सहायता | assistance |
2 आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।
वह सहायता स्वयं उस व्यक्ति के पास आती है, या उसे वहाँ ले जाती है जहाँ उसका मिलना नियत है।
English explanation
That assistance comes to the person of itself, or takes the person to where it is destined to be found.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपुनु | स्वयं | of itself |
| आवइ | आती है | comes |
| ताहि | उस व्यक्ति | that person |
| पहिं | के पास | to; near |
| ताहि | उस व्यक्ति को | that person |
| तहाँ | वहाँ | there |
| लै | लेकर | taking |
| जाइ | जाती है | goes |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 159 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.159
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 164
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।