बालकाण्ड · दोहा 7 (घ) · दोहा/सोरठा
देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।
देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।
बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।
देवता, दानव, मनुष्य, नाग, पक्षी, प्रेत, पितर और गंधर्व—
English explanation
Gods, demons, humans, nagas, birds, spirits, ancestors, and gandharvas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवता | gods |
| दनुज | दानव; असुर | demons; asuras |
| नर | मनुष्य | humans |
| नाग | नाग; सर्पजाति के प्राणी | nagas; serpent beings |
| खग | पक्षी | birds |
| प्रेत | प्रेतात्माएँ | departed spirits |
| पितर | दिवंगत पूर्वज | departed ancestors |
| गंधर्ब | गंधर्व; दिव्य गायक | gandharvas; celestial musicians |
2 बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।
—तथा किन्नरों और राक्षसों की मैं वंदना करता हूँ। अब आप सभी कृपा करें।
English explanation
—as well as kinnaras and demons: I bow to them all. May you all now show grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow to |
| किंनर | किन्नर; दिव्य प्राणियों का एक वर्ग | kinnaras, a class of celestial beings |
| रजनिचर | रात्रिचर राक्षस | night-roaming demons |
| कृपा | अनुग्रह | grace |
| करहु | करें | please bestow |
| अब | अब | now |
| सर्ब | आप सभी | all of you |
| घ | पद्य-संदर्भ चिह्न (घ) | verse reference marker (घ) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7 (घ)
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।