बालकाण्ड · दोहा 7 (ग) · दोहा/सोरठा
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।
बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।
जगत में जितने जड़ और चेतन जीव या अस्तित्व हैं, सबको राममय जानकर—
English explanation
Knowing all the insentient and sentient beings and existences in the world to be pervaded by Rama—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जड़ | अचेतन | insentient |
| चेतन | चेतना वाले | sentient |
| जग | संसार में | in the world |
| जीव | जीव; अस्तित्व | beings; existences |
| जत | जितने भी | all that there are |
| सकल | सभी | all |
| राममय | राम से व्याप्त | pervaded by Rama |
| जानि | जानकर | knowing |
2 बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।
—मैं सदा दोनों हाथ जोड़कर सबके कमल-समान चरणों की वंदना करता हूँ।
English explanation
—I ever join both hands and bow to the lotus-like feet of all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow to |
| सब | सब | all |
| के | के | of |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| सदा | हमेशा | always |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जुग | दोनों | both |
| पानि | हाथ | hands |
| ग | पद्य-संदर्भ चिह्न (ग) | verse reference marker (ग) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।