बालकाण्ड · छंद · छंद
सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसरस्वती, वेद, शेषजी और सम्पूर्ण ऋषि कोई भी जिनको नहीं जानते, जिन्हें दीन प्रिय हैं, ऐसा वेद पुकारकर कहते हैं, वे ही श्रीभगवान् हमपर दया करें। हे संसाररूपी समुद्रके [मथनेके] लिये मन्दराचलरूप, सब प्रकारसे सुन्दर, गुणोंके धाम और सुखोंकी राशि नाथ! आपके चरणकमलोंमें मुनि, सिद्ध और सारे देवता भयसे अत्यन्त व्याकुल होकर नमस्कार करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 187 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।
जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।
भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।
मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।
स्रोत अभिलेख 1.186 · पुस्तक पृ. 186, 188
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।
English explanation
He whom none—not Saraswati, the Vedas, Shesha, or all the sages—has fully known—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | विद्या और वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of learning and speech |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| सेषा | शेषनाग | Shesha, the cosmic serpent |
| रिषय | ऋषि | sages |
| असेषा | समस्त | all |
| जा | जिनको | whom |
| कहुँ | को | object marker |
| कोउ | कोई भी | anyone |
| नहि | नहीं | not |
| जाना | जान पाया | has known |
2 जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।
English explanation
The Vedas proclaim that the lowly are dear to him—may that blessed Lord be moved with compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिन्हें | to whom |
| दीन | दीन जन | the lowly |
| पिआरे | प्रिय हैं | are dear |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुकारे | पुकारकर कहते हैं | proclaim |
| द्रवउ | दयावश द्रवित हों | may be moved with compassion |
| सो | वही | that very |
| श्रीभगवाना | श्रीमान भगवान | blessed Lord |
3 भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।
English explanation
O Lord, like Mount Mandara for the ocean of worldly existence, beautiful in every way, abode of virtues and abundance of happiness!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| बारिधि | समुद्र के लिए | for the ocean |
| मंदर | मंदराचल पर्वत समान | like Mount Mandara |
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in way |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| गुनमंदिर | गुणों के धाम | abode of virtues |
| सुखपुंजा | सुख की राशि | abundance of happiness |
4 मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।
English explanation
O Lord, sages, perfected beings, and all the gods, deeply stricken with fear, bow to your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | sages |
| सिद्ध | साधना में सिद्ध जन | spiritually accomplished beings |
| सकल | सभी | all |
| सुर | देवता | gods |
| परम | अत्यंत | deeply |
| भयातुर | भय से व्याकुल | stricken with fear |
| नमत | प्रणाम करते हैं | bow to |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| पद | आपके चरण | your feet |
| कंजा | कमल-समान | lotus-like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 187
- सहायक विषय
- पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
- मुद्रित पृष्ठ
- 186, 188
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।