बालकाण्ड · छंद · छंद
जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।
मूल पाठ
जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।
सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।
जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।
मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।
स्रोत अभिलेख 1.186 · पुस्तक पृ. 186, 188
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने बिना किसी दूसरे संगी अथवा सहायकके अकेले ही [या स्वयं अपनेको त्रिगुणरूप— ब्रह्मा, विष्णु, शिवरूप—बनाकर अथवा बिना किसी उपादान-कारणके अर्थात् स्वयं ही सृष्टिका अभिन्ननिमित्तोपादान कारण बनकर] तीन प्रकारकी सृष्टि उत्पन्न की, वे पापोंका नाश करनेवाले भगवान् हमारी सुधि लें। हम न भक्ति जानते हैं, न पूजा। जो संसारके (जन्म-मृत्युके) भयका नाश करनेवाले, मुनियोंके मनको आनन्द देनेवाले और विपत्तियोंके समूहको नष्ट करनेवाले हैं। हम सब देवताओंके समूह मन, वचन और कर्मसे चतुराई करनेकी बान छोड़कर उन (भगवान्) की शरण [आये] हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 187 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।
English explanation
He who brought forth creation and fashioned it in threefold form, with no other helper beside him—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| सृष्टि | जगत की रचना | creation |
| उपाई | उत्पन्न की | brought forth |
| त्रिबिध | तीन प्रकार की | threefold |
| बनाई | बनाई | fashioned |
| संग | साथ | beside him |
| सहाय | सहायक | helper |
| न | नहीं | no |
| दूजा | दूसरा | other |
2 सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।
English explanation
May that destroyer of sins care for us; we know neither devotion nor worship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that very one |
| करउ | करें | may undertake |
| अघारी | पापों के शत्रु, पाप-नाशक | enemy and destroyer of sins |
| चिंत | चिंता, देखभाल | care |
| हमारी | हमारी | for us |
| जानिअ | हम जानते हैं | we know |
| भगति | भक्ति | devotion |
| न | नहीं, न ही | neither, nor |
| पूजा | पूजा | worship |
3 जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।
English explanation
He who dispels the fear of worldly existence, delights the minds of sages, and destroys hosts of calamities—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| भव | सांसारिक जन्म-मरण का | of worldly existence |
| भय | भय | fear |
| भंजन | दूर करने वाले | dispeller |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन को | the minds |
| रंजन | आनंद देने वाले | delighter |
| गंजन | नाश करने वाले | destroyer |
| बिपति | विपत्तियों के | of calamities |
| बरूथा | समूह | hosts |
4 मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।
English explanation
Abandoning clever speech, all the hosts of gods take refuge in him in thought, word, and deed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | in thought |
| बच | वचन से | in word |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बानी | वाणी | speech |
| छाड़ि | छोड़कर | abandoning |
| सयानी | चतुराई-भरी | clever |
| सरन | शरण में | in refuge |
| सकल | सभी | all |
| सुर | देवताओं के | of gods |
| जूथा | समूह | hosts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 187
- सहायक विषय
- पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
- मुद्रित पृष्ठ
- 186, 188
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।