बालकाण्ड · छंद · छंद
मुनि धीर जोगी सिद्ध संतत बिमल मन जेहि ध्यावहीं।
मूल पाठ
मुनि धीर जोगी सिद्ध संतत बिमल मन जेहि ध्यावहीं।
कहि नेति निगम पुरान आगम जासु कीरति गावहीं॥
सोइ रामु ब्यापक ब्रह्म भुवन निकाय पति माया धनी।
अवतरेउ अपने भगत हित निजतंत्र नित रघुकुलमनी॥
स्रोत अभिलेख 1.51 · पुस्तक पृ. 72, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बादज्ञानी मुनि, योगी और सिद्ध निरन्तर निर्मल चित्तसे जिनका ध्यान करते हैं तथा वेद, पुराण और शास्त्र 'नेति-नेति कहकर जिनकी कीॢत गाते हैं, उन्हीं सर्वव्यापक, समस्त ब्रह्माण्डोंके स्वामी, मायापति, नित्य परम स्वतन्त्र ब्रह्मरूप भगवान् श्रीरामजीने अपने भक्तोंके हितके लिये [अपनी इच्छासे] रघुकुलके मणिरूपमें अवतार लिया है।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 73 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1मुनि धीर जोगी सिद्ध संतत बिमल मन जेहि ध्यावहीं।
English explanation
AI draft: The one whom sages, steadfast people, yogis, and perfected adepts constantly meditate upon with pure minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि; मननशील ऋषि | sages |
| धीर | धैर्यवान, स्थिरबुद्धि पुरुष | steadfast, composed people |
| जोगी | योग-साधक | yogis |
| सिद्ध | साधना में सिद्ध पुरुष | perfected spiritual adepts |
| संतत | निरंतर | constantly |
| बिमल | निर्मल | pure |
| मन | मन से | with the mind |
| जेहि | जिनका; जिस परमात्मा का | whom; the divine one whom |
| ध्यावहीं | ध्यान करते हैं | meditate upon |
2कहि नेति निगम पुरान आगम जासु कीरति गावहीं॥
English explanation
AI draft: The one whose glory the Vedas, Puranas, and Agamas sing while declaring ‘not this’—beyond any exhaustive description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; कहते हुए | saying; while declaring |
| नेति | ‘यह नहीं’; वर्णन की सीमा बताने वाला निषेध | ‘not this’; a denial of exhaustive description |
| निगम | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण ग्रंथ | the Puranas |
| आगम | आगम शास्त्र | the Agama scriptures |
| जासु | जिनकी | whose |
| कीरति | कीर्ति; महिमा | glory; renown |
| गावहीं | गाते हैं | sing |
3सोइ रामु ब्यापक ब्रह्म भुवन निकाय पति माया धनी।
English explanation
AI draft: That very Rama is the all-pervading Brahman, lord of all the worlds and master of maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very one |
| रामु | राम; रघुवंश के प्रभु | Rama, lord of the Raghu dynasty |
| ब्यापक | सर्वत्र व्याप्त | all-pervading |
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम तत्त्व | Brahman, the ultimate reality |
| भुवन | लोकों का | of the worlds |
| निकाय | समूह; समस्त समुदाय | the entire assemblage |
| पति | स्वामी | lord |
| माया | माया; ईश्वरीय शक्ति | maya, divine power |
| धनी | स्वामी; अधिपति | master; possessor |
4अवतरेउ अपने भगत हित निजतंत्र नित रघुकुलमनी॥
English explanation
AI draft: Rama, the jewel of the Raghu lineage, ever independent, descended for the welfare of his devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवतरेउ | अवतरित हुए | descended; became incarnate |
| अपने | अपने | his own |
| भगत | भक्तों के | of his devotees |
| हित | हित के लिए | for the welfare |
| निजतंत्र | स्वतंत्र; अपने ही वश में | independent; governed by himself alone |
| नित | सदा | ever; always |
| रघुकुलमनी | रघुकुल के मणि; राम | Rama, the jewel of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 73
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 72, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।