बालकाण्ड · छंद · छंद
माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
मूल पाठ
माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।
स्रोत अभिलेख 1.192 · पुस्तक पृ. 192, 193
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाताकी वह बुद्धि बदल गयी, तब वह फिर बोली—हे तात! यह रूप छोड़कर अत्यन्त प्रिय बाललीला करो, [मेरे लिये] यह सुख परम अनुपम होगा। [माताका] यह वचन सुनकर देवताओंके स्वामी सुजान भगवान्ने बालक [रूप] होकर रोना शुरू कर दिया। [तुलसीदासजी कहते हैं—] जो इस चरित्रका गान करते हैं, वे श्रीहरिका पद पाते हैं और [फिर] संसाररूपी कूपमें नहीं गिरते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 193 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
English explanation
The mother spoke again, her earlier understanding having shifted: ‘Dear child, relinquish this form.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माता | माता कौसल्या | mother Kausalya |
| पुनि | फिर | again |
| बोली | बोलीं | spoke |
| सो | वह पूर्व की | that earlier |
| मति | बुद्धि | understanding |
| डौली | डोल गई, बदल गई | wavered, shifted |
| तजहु | छोड़ दीजिए | please relinquish |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear child |
| यह | यह | this |
| रूपा | स्वरूप | form |
2 कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।
English explanation
‘O you of deeply endearing nature, play the part of an infant; this joy is utterly matchless.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीजै | कीजिए | please perform |
| सिसुलीला | शिशु की लीला | an infant’s play |
| अति | अत्यंत | deeply |
| प्रियसीला | हे प्रिय स्वभाव वाले | O one of endearing nature |
| यह | यह | this |
| सुख | सुख | joy |
| परम | परम | supremely |
| अनूपा | अनुपम | matchless |
3 सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
English explanation
Hearing the mother’s words, the all-knowing Lord, ruler of the gods, became a baby and began to cry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बचन | वचन | words |
| सुजाना | सर्वज्ञ प्रभु | the all-knowing Lord |
| रोदन | रोना | crying |
| ठाना | आरंभ किया | began |
| होइ | बनकर | having become |
| बालक | बालक | a baby |
| सुरभूपा | देवताओं के स्वामी | ruler of the gods |
4 यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।
English explanation
Those who sing this account attain Hari’s feet and do not fall into the well of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| चरित | चरित, लीला का वृत्तांत | account of these deeds |
| जे | जो लोग | those who |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| हरिपद | हरि के चरण | the feet of Hari, the Lord |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain |
| ते | वे | they |
| न | नहीं | not |
| परहिं | गिरते हैं | fall |
| भवकूपा | संसाररूपी कुएँ में | into the well of worldly existence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.192
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 193
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 192, 193
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।