बालकाण्ड · छंद · छंद
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवेद कहते हैं कि तुम्हारे प्रत्येक रोममें मायाके रचे हुए अनेकों ब्रह्माण्डोंके समूह [भरे] हैं। वे तुम मेरे गर्भमें रहे—इस हँसीकी बातके सुननेपर धीर (विवेकी) पुरुषोंकी बुद्धि भी स्थिर नहीं रहती (विचलित हो जाती है)। जब माताको ज्ञान उत्पन्न हुआ, तब प्रभु मुसकराये। वे बहुत प्रकारके चरित्र करना चाहते हैं। अत: उन्होंने [पूर्वजन्मकी] सुन्दर कथा कहकर माताको समझाया, जिससे उन्हें पुत्रका (वात्सल्य) प्रेम प्राप्त हो (भगवान्के प्रति पुत्रभाव हो जाय)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 192 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।
स्रोत अभिलेख 1.192 · पुस्तक पृ. 192, 193
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
English explanation
‘The Vedas say that multitudes of universes created through maya are within each hair of your body.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मांड | ब्रह्मांडों के | of universes |
| निकाया | समूह | multitudes |
| निर्मित | रचे हुए | created |
| माया | माया से | through maya |
| रोम | रोम | hair of the body |
| रोम | एक-एक रोम | each individual hair |
| प्रति | प्रत्येक में | within each |
| बेद | वेद | the Vedas |
| कहै | कहते हैं | say |
2 मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।
English explanation
‘That same Lord dwelt within me—this sounds like a jest; even the foremost of the steadfast cannot remain composed on hearing it.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| उर | उर में, यहाँ गर्भ के आशय में | within me, here implying the womb |
| सो | वही प्रभु | that same Lord |
| बासी | निवास करने वाले | dwelling |
| यह | यह बात | this statement |
| उपहासी | उपहास जैसी | like a jest |
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| धीर | धीर व्यक्तियों के | of the steadfast |
| पति | स्वामी, सर्वश्रेष्ठ | master, foremost |
| थिर | स्थिर | composed |
| न | नहीं | not |
| रहै | रहते | remain |
3 उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
English explanation
When this realization arose in the mother, the Lord smiled; he wished to enact many kinds of deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| जब | जब | when |
| ग्याना | ज्ञान | realization |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मुसकाना | मुस्कुराए | smiled |
| चरित | लीलाएँ | deeds or divine play |
| बहुत | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार की | kinds of |
| कीन्ह | करना | to perform |
| चहै | चाहते हैं | wishes |
4 कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।
English explanation
He told a pleasing account and explained it to his mother so that she might feel love for him as her son.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having told |
| कथा | कथा | an account |
| सुहाई | मनोहर | pleasing |
| मातु | माता को | to his mother |
| बुझाई | समझाया | explained |
| जेहि | जिस | in such a |
| प्रकार | प्रकार से | manner |
| सुत | पुत्र के प्रति | for her son |
| प्रेम | प्रेम | love |
| लहै | वह प्राप्त करें | she might experience |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.192
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 192
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 192, 193
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।