बालकाण्ड · छंद · छंद
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
मूल पाठ
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।
स्रोत अभिलेख 1.192 · पुस्तक पृ. 192, 193
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनों हाथ जोड़कर माता कहने लगी—हे अनन्त! मैं किस प्रकार तुम्हारी स्तुति करूँ। वेद और पुराण तुमको माया, गुण और ज्ञानसे परे और परिमाणरहित बतलाते हैं। श्रुतियाँ और संतजन दया और सुखका समुद्र, सब गुणोंका धाम कहकर जिनका गान करते हैं, वही भक्तोंपर प्रेम करनेवाले लक्ष्मीपति भगवान् मेरे कल्याणके लिये प्रकट हुए हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 192 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
English explanation
Joining both hands, the mother says, ‘O infinite Lord, how can I praise you?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहती हैं | she says |
| दुइ | दोनों | both |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | joining |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| तोरी | आपकी | of you |
| केहि | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | way |
| करौं | मैं करूँ | shall I offer |
| अनंता | हे अनंत प्रभु | O infinite Lord |
2 माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।
English explanation
‘The Vedas and Puranas declare you beyond maya, the qualities of nature, and knowledge, and beyond measure.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माया | माया से | maya, the power of appearance |
| गुन | प्रकृति के गुणों से | the qualities of nature |
| ग्यानातीत | ज्ञान से भी परे | beyond knowledge as well |
| अमाना | माप से रहित | immeasurable |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| भनंता | बताते हैं | declare |
3 करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
English explanation
‘He who is an ocean of compassion and bliss, a treasury of all virtues, whom the Vedas and saints praise—’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करुना | करुणा | compassion |
| सुख | सुख | bliss |
| सागर | सागर | ocean |
| सब | सभी | all |
| गुन | सद्गुणों के | of virtues |
| आगर | भंडार | treasury |
| जेहि | जिनका | whom |
| गावहिं | गुणगान करते हैं | praise |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संता | संत | saints |
4 सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।
English explanation
‘That very Lord, beloved of Lakshmi and loving toward his devotees, has appeared for my benefit.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that very one |
| मम | मेरे | my |
| हित | हित के | benefit |
| लागी | लिए | for |
| जन | भक्तों से | toward devotees |
| अनुरागी | प्रेम करने वाले | loving |
| भयउ | हुए | has become |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| श्रीकंता | लक्ष्मी के पति | Lakshmi’s consort |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.192
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 192
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 192, 193
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।