बालकाण्ड · छंद · छंद
जप जोग बिरागा तप मख भागा श्रवन सुनइ दससीसा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजप, योग, वैराग्य, तप तथा यज्ञमें [देवताओंके] भाग पानेकी बात रावण कहीं कानोंसे सुन पाता, तो [उसी समय ] स्वयं उठ दौड़ता। कुछ भी रहने नहीं पाता, वह सबको पकड़कर विध्वंस कर डालता था। संसारमें ऐसा भ्रष्ट आचरण फैल गया कि धर्म तो कानोंमें भी सुननेमें नहीं आता था; जो कोई वेद और पुराण कहता, उसको बहुत तरहसे त्रास देता और देशसे निकाल देता था।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 184 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जप जोग बिरागा तप मख भागा श्रवन सुनइ दससीसा।
आपुनु उठि धावइ रहै न पावइ धरि सब घालइ खीसा॥
अस भ्रष्ट अचारा भा संसारा धर्म सुनिअ नहिं काना।
तेहि बहुबिधि त्रासइ देस निकासइ जो कह बेद पुराना॥
स्रोत अभिलेख 1.183 · पुस्तक पृ. 183, 184
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जप जोग बिरागा तप मख भागा श्रवन सुनइ दससीसा।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Whenever Ravana, the ten-headed king, hears of mantra repetition, yoga, dispassion, austerities, or sacrificial portions—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | मंत्र या नाम का बार-बार उच्चारण | repetition of a mantra or sacred name |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| बिरागा | विषयों से विरक्ति; वैराग्य | dispassion toward worldly pleasures |
| तप | तपस्या | austerities |
| मख | यज्ञ | sacrifice |
| भागा | यज्ञ में अर्पित भाग | portions offered in sacrifice |
| श्रवन | कानों से | with his ears |
| सुनइ | सुनता है | he hears |
| दससीसा | दस सिरों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
2आपुनु उठि धावइ रहै न पावइ धरि सब घालइ खीसा॥
English explanation
He himself rises and rushes there, lets nothing remain, and seizes and destroys them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपुनु | स्वयं, खुद रावण | he himself, Ravana |
| उठि | उठकर | having risen |
| धावइ | दौड़ पड़ता है | rushes there |
| रहै | रहने; बने रहने | to remain or continue |
| न | नहीं | not |
| पावइ | पाने देता है | allows to do so |
| धरि | पकड़कर | having seized |
| सब | सबको | all of them |
| घालइ | कर डालता है | renders or makes |
| खीसा | नष्ट; समाप्त | destroyed; brought to an end |
3अस भ्रष्ट अचारा भा संसारा धर्म सुनिअ नहिं काना।
English explanation
Thus the world became corrupt in conduct; no word of righteousness was heard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; in this way |
| भ्रष्ट | बिगड़ा हुआ; दूषित | corrupt; depraved |
| अचारा | आचरण वाला | in conduct |
| भा | हो गया | became |
| संसारा | संसार | the world |
| धर्म | धर्म; सदाचरण की बात | righteousness; talk of virtuous conduct |
| सुनिअ | सुनाई देता | is heard |
| नहिं | नहीं | not |
| काना | कानों में | in the ears |
4तेहि बहुबिधि त्रासइ देस निकासइ जो कह बेद पुराना॥
English explanation
Whoever spoke of the Vedas and Puranas, Ravana tormented in many ways and expelled from the land.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसे; वेद-पुराण कहने वाले को | that person; the one speaking of the scriptures |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| त्रासइ | सताता या डराता है | torments or terrorizes |
| देस | देश से | from the land |
| निकासइ | निकाल देता है | expels |
| जो | जो कोई | whoever |
| कह | कहता या सुनाता है | speaks of or recites |
| बेद | वेद; प्राचीन वैदिक धर्मग्रंथ | the Vedas, ancient sacred scriptures |
| पुराना | पुराण; प्राचीन धार्मिक आख्यान-ग्रंथ | the Puranas, sacred narrative texts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.183
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 184
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 183, 184
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।