बालकाण्ड · छंद · छंद
को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकौन किसे जाने-पहिचाने! आनन्दके वश हुई सब दूलह बने हुए ब्रह्मका परछन करने चलीं। मनोहर गान हो रहा है। मधुर-मधुर नगाड़े बज रहे हैं, देवता फूल बरसा रहे हैं, बड़ी अच्छी शोभा है। आनन्दकन्द दूलहको देखकर सब स्त्रियाँ हृदयमें हॢषत हुईं। उनके कमल-सरीखे नेत्रोंमें प्रेमाश्रुओंका जल उमड़ आया और सुन्दर अङ्गोंमें पुलकावली छा गयी।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 299 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली।
कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली॥
आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकल हियँ हरषित भई।
अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई॥
स्रोत अभिलेख 1.318 · पुस्तक पृ. 298, 299
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली।
English explanation
Who can know what joy moved all the women to perform the welcoming rite for Rama, the bridegroom who is Brahman!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| जान | जान सकता है | can know |
| केहि | किस | what |
| आनंद | आनंद | joy |
| बस | के वश में | under the sway of |
| सब | सब स्त्रियाँ | all the women |
| ब्रह्मु | ब्रह्मस्वरूप राम | Rama as Brahman, the absolute reality |
| बर | दूल्हे का | of the bridegroom |
| परिछन | मंगलमय स्वागत की परिछन-विधि करने | to perform the ceremonial welcoming rite |
| चली | चलीं | went |
2कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली॥
English explanation
Lovely songs and sweet-sounding ceremonial drums resound; the gods shower flowers, and the scene is beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कल | सुहावने, मधुर | lovely, melodious |
| गान | गीत | songs |
| मधुर | मधुर स्वर वाले | sweet-sounding |
| निसान | नगाड़े | ceremonial kettledrums |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुर | देवता | the gods |
| सोभा | शोभा | splendor |
| भली | सुंदर | beautiful |
3आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकल हियँ हरषित भई।
English explanation
Seeing Rama, the bridegroom and source of joy, all the women became delighted at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनंदकंदु | आनंद के मूल राम | Rama, the source of joy |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| दूलहु | दूल्हे को | the bridegroom |
| सकल | सभी स्त्रियाँ | all the women |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषित | प्रसन्न | delighted |
| भई | हो गईं | became |
4अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई॥
English explanation
Tears welled up in their lotus-like eyes, and waves of goosebumps spread over their lovely limbs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंभोज | कमल जैसे | lotus-like |
| अंबक | नेत्रों में | in the eyes |
| अंबु | आँसू | tears |
| उमगि | उमड़ आए | welled up |
| सुअंग | सुंदर अंगों पर | over their lovely limbs |
| पुलकावलि | रोमांच की पंक्तियाँ | rows of goosebumps |
| छई | छा गईं | spread over |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.318
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 299
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 298, 299
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।