बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।
मूल पाठ
कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।
करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।
स्रोत अभिलेख 1.318 · पुस्तक पृ. 298, 299
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सब कपटसे सुन्दर स्त्रीका वेष बनाकर रनिवासमें जा मिलीं और मनोहर वाणीसे मङ्गलगान करने लगीं। सब कोई हर्षके विशेष वश थे, अत: किसीने उन्हें पहचाना नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 299 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।
English explanation
Disguising themselves beautifully as mortal women, they went and mingled with all the women of the royal household.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपट | छद्म रूप में | in disguise |
| नारि | मानवी स्त्री का | of a mortal woman |
| बर | सुंदर | beautiful |
| बेष | वेश | guise |
| बनाई | बनाकर | having assumed |
| मिलीं | मिल गईं | mingled |
| सकल | सभी | all |
| रनिवासहिं | रनिवास की स्त्रियों से | with the women of the royal household |
| जाई | जाकर | having gone |
2 करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।
English explanation
They sing auspicious songs in sweet voices; everyone is so overcome with joy that no one recognizes them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करती हैं | perform |
| गान | गायन | singing |
| कल | मधुर | sweet |
| मंगल | मंगलमय | auspicious |
| बानीं | वाणी में | in their voices |
| हरष | हर्ष से | with joy |
| बिबस | विभोर | overcome |
| सब | सभी | everyone |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| जानी | उन्हें पहचाना | recognized them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.318
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 299
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 298, 299
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।