बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।
मूल पाठ
होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।
जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप सब प्रसन्न होकर यह वरदान दीजिये कि साधु-समाजमें मेरी कविताका सम्मान हो; क्योंकि बुद्धिमान् लोग जिस कविताका आदर नहीं करते, मूर्ख कवि ही उसकी रचनाका व्यर्थ परिश्रम करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 35 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।
English explanation
Be pleased and grant this boon: may the assembly of virtuous people honor my poetry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहु | होइए | please be |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| देहु | दीजिए | please give |
| बरदानू | वरदान | a boon |
| साधु | सज्जनों का | of virtuous people |
| समाज | समुदाय | assembly |
| भनिति | कविता; काव्य-रचना | poetry; poetic composition |
| सनमानू | सम्मान करे | may honor |
2 जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।
English explanation
When the discerning do not esteem a composition, the immature poets who create it labor in vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिस | which |
| प्रबंध | काव्य-रचना को | poetic composition |
| बुध | सुज्ञानी लोग | discerning people |
| नहिं | नहीं | not |
| आदरहीं | आदर करते | esteem |
| सो | वह | that |
| श्रम | परिश्रम | labor |
| बादि | व्यर्थ | in vain |
| बाल | अपरिपक्व; अनाड़ी | immature; inexperienced |
| कबि | कवि | poets |
| करहीं | करते हैं | undertake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 35
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।