बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकीॢत, कविता और सम्पत्ति वही उत्तम है जो गङ्गाजीकी तरह सबका हित करनेवाली हो। श्रीरामचन्द्रजीकी कीॢत तो बड़ी सुन्दर (सबका अनन्त कल्याण करनेवाली ही) है, परन्तु मेरी कविता भद्दी है। यह असामञ्जस्य है (अर्थात् इन दोनोंका मेल नहीं मिलता), इसीकी मुझे चिन्ता है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 35 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।
राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।
English explanation
Only that fame, poetry, and prosperity is good which, like the Ganges, benefits everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीरति | कीर्ति | fame |
| भनिति | कविता | poetry |
| भूति | संपत्ति; समृद्धि | wealth; prosperity |
| भलि | अच्छी | good |
| सोई | वही | that alone |
| सुरसरि | गंगा नदी | the river Ganges |
| सम | के समान | like |
| सब | सब | everyone |
| कहँ | के लिए | for |
| हित | हितकारी | beneficial |
| होई | हो | is |
2 राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।
English explanation
Rama’s renown is glorious, but my poetry is uncouth; this mismatch causes me apprehension.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| सुकीरति | सुंदर कीर्ति | glorious renown |
| भनिति | मेरी कविता | my poetry |
| भदेसा | अनगढ़; असंस्कृत | uncouth; unpolished |
| असमंजस | असंगति; दुविधा | mismatch; perplexity |
| अस | ऐसी | such |
| मोहि | मुझे | to me |
| अँदेसा | आशंका; चिंता | apprehension; concern |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 35
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।