बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु हे कवियो! आपकी कृपासे यह बात भी मेरे लिये सुलभ हो सकती है। रेशमकी सिलाई टाटपर भी सुहावनी लगती है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 36 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।
English explanation
Through your grace, even that is readily possible for me, just as coarse sackcloth looks pleasing when stitched with silk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरी | आपकी | your |
| कृपा | कृपा से | through grace |
| सुलभ | सहज संभव | readily attainable |
| सोउ | वह भी | even that |
| मोरे | मेरे लिए | for me |
| सिअनि | सिलाई; जोड़ | stitching; joining |
| सुहावनि | सुंदर लगने वाली | pleasing |
| टाट | मोटा बोरी-कपड़ा | coarse sackcloth |
| पटोरे | रेशमी वस्त्र के साथ | with silk cloth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 36
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।