बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।
मूल पाठ
जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।
भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो बड़े बुद्धिमान् प्राकृत कवि हैं, जिन्होंने भाषामें हरिचरित्रोंका वर्णन किया है, जो ऐसे कवि पहले हो चुके हैं, जो इस समय वर्तमान हैं और जो आगे होंगे, उन सबको मैं सारा कपट त्याग- कर प्रणाम करता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 35 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।
English explanation
Those highly discerning vernacular poets who have narrated Hari’s deeds in the common language—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| प्राकृत | लोकभाषा में रचने वाले | vernacular |
| कबि | कवि | poets |
| परम | अत्यंत | highly |
| सयाने | सुजान; समझदार | discerning; wise |
| भाषाँ | लोकभाषा में | in the vernacular |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| चरित | चरित्र; कार्य | deeds; story |
| बखाने | वर्णन किए | narrated |
2 भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।
English explanation
Those who lived before, those who live now, and those yet to come—I bow to them all, abandoning every trace of deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | पहले हुए | lived in the past |
| जे | जो | those who |
| अहहिं | अब हैं | exist now |
| जे | जो | those who |
| होइहहिं | होंगे | will exist |
| आगें | भविष्य में | in the future |
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| सबहिं | सभी को | to them all |
| कपट | छल; बनावट | deceit; insincerity |
| सब | सारा | all |
| त्यागें | त्यागकर | having abandoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 35
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।