बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।
मूल पाठ
हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।
करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 1.156 · पुस्तक पृ. 161, 162
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[राजाके] हृदयमें किसी फलकी टोह (कामना) न थी। राजा बड़ा ही बुद्धिमान् और ज्ञानी था। वह ज्ञानी राजा कर्म, मन और वाणीसे जो कुछ भी धर्म करता था, सब भगवान् वासुदेवके अॢपत करके करता था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 161 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।
English explanation
AI draft: The king was discerning and exceptionally wise; he harbored no desire for the fruits of his actions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| फल | कर्म का फल | the fruits of action |
| अनुसंधाना | आकांक्षा या ध्यान | desire for or attention to |
| भूप | राजा | the king |
| बिबेकी | विवेकशील | discerning |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुजाना | समझदार | wise |
2 करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।
English explanation
Whatever religious duties and acts the wise king performed with mind and speech, he dedicated to Lord Vasudeva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करइ | करता था | performed |
| जे | जो भी | whatever |
| धरम | धार्मिक कर्तव्य | religious duties |
| करम | कर्म या अनुष्ठान | acts or observances |
| मन | मन से | with the mind |
| बानी | वाणी से | with speech |
| बासुदेव | भगवान वासुदेव को | to Lord Vasudeva |
| अर्पित | समर्पित | dedicated |
| नृप | राजा | the king |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.156
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 161
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 161, 162
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।