बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।
मूल पाठ
हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।
समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।
स्रोत अभिलेख 1.87 · पुस्तक पृ. 101, 102
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में बड़ा हाहाकार मच गया। देवता डर गये, दैत्य सुखी हुए। भोगी लोग कामसुखको याद करके चिन्ता करने लगे और साधक योगी निष्कंटक हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 102 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।
English explanation
A great outcry arose throughout the world. The gods were frightened, while the demons rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हाहाकार | विलाप और भय का कोलाहल | outcry of grief and alarm |
| भयउ | हुआ | arose |
| जग | जगत में | in the world |
| भारी | बहुत बड़ा | great |
| डरपे | डर गए | were frightened |
| सुर | देवता | gods |
| भए | हो गए | became |
| असुर | असुर | demons |
| सुखारी | प्रसन्न | happy |
2 समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।
English explanation
Thinking of sensual pleasure, pleasure-seekers grieved; spiritual practitioners and yogis became free of hindrance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | विचार करके | thinking of |
| कामसुखु | काम-भोग का सुख | sensual pleasure |
| सोचहिं | चिंता और शोक करते हैं | worry and grieve |
| भोगी | इंद्रिय-सुख के भोगी | seekers of sensual pleasure |
| भए | हो गए | became |
| अकंटक | बाधा से मुक्त | free of hindrance |
| साधक | आध्यात्मिक साधना करने वाले | spiritual practitioners |
| जोगी | योगी | practitioners of yoga |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 102
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना · रतिको वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 101, 102
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।