बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब आमके पत्तोंमें [छिपे हुए] कामदेवको देखा तो उन्हें बड़ा क्रोध हुआ, जिससे तीनों लोक काँप उठे। तब शिवजीने तीसरा नेत्र खोला, उनके देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 102 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।
तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।
स्रोत अभिलेख 1.87 · पुस्तक पृ. 101, 102
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।
English explanation
Shiva saw Kama amid the foliage of the fragrant mango tree. Anger arose in him, and the three worlds trembled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौरभ | सुगंधित आम वृक्ष के | of the fragrant mango tree |
| पल्लव | पत्तों में | amid the foliage |
| मदनु | कामदेव को | Kama, the god of desire |
| बिलोका | देखा | saw |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| कोपु | क्रोध | anger |
| कंपेउ | काँप उठा | trembled |
| त्रैलोका | तीनों लोक | the three worlds |
2 तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।
English explanation
Then Shiva opened his third eye. At his glance, Kama burned to ashes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सिवँ | शिव ने | Shiva |
| तीसर | तीसरा | third |
| नयन | नेत्र | eye |
| उघारा | खोला | opened |
| चितवत | देखते ही | at his glance |
| कामु | कामदेव | Kama, the god of desire |
| भयउ | हो गए | became |
| जरि | जलकर | having burned |
| छारा | राख | ashes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 102
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना · रतिको वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 101, 102
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।