बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे मुनिराज! हम ब्राह्मण नहीं हैं, शिवजीके गण हैं। हमने बड़ा अपराध किया, जिसका फल हमने पा लिया। हे कृपालु! अब शाप दूर करनेकी कृपा कीजिये। दीनोंपर दया करनेवाले नारदजीने कहा—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 148 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।
श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।
स्रोत अभिलेख 1.139 · पुस्तक पृ. 147, 148
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।
English explanation
O chief of sages, we are Shiva’s attendants, not Brahmins. We committed a grave offense and have received its consequence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव के | of Shiva |
| गन | गण; सेवक | attendants |
| हम | हम | we |
| न | नहीं | not |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| मुनिराया | हे मुनिराज | O chief of sages |
| बड़ | बड़ा; गंभीर | great; grave |
| अपराध | अपराध | offense |
| कीन्ह | किया | committed |
| फल | परिणाम | consequence |
| पाया | पाया; भोगा | received; suffered |
2 श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।
English explanation
O compassionate one, grant us mercy concerning your curse. Then Narada, compassionate toward the distressed, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्राप | शाप के विषय में | concerning the curse |
| अनुग्रह | कृपा; अनुग्रह | mercy; favor |
| करहु | कीजिए | please grant |
| कृपाला | हे कृपालु | O compassionate one |
| बोले | बोले | spoke |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| दीनदयाला | दीनों पर दया करने वाले | compassionate toward the distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.139
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 148
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 148
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।