बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।
मूल पाठ
हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।
अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।
स्रोत अभिलेख 1.139 · पुस्तक पृ. 147, 148
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीके गणोंने जब मुनिको मोहरहित और मनमें बहुत प्रसन्न होकर मार्गमें जाते हुए देखा तब वे अत्यन्त भयभीत होकर नारदजीके पास आये और उनके चरण पकड़कर दीन वचन बोले—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 147 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।
English explanation
AI draft: Shiva’s attendants saw the sage Narada going along the road. His delusion had departed, and his heart was especially joyful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव के | of Shiva |
| गन | गण; सेवक | attendants |
| मुनिहि | मुनि नारद को | the sage Narada |
| जात | जाते हुए | going |
| पथ | मार्ग में | along the road |
| देखी | देखा | saw |
| बिगतमोह | मोह से मुक्त | freed from delusion |
| मन | मन में | in his heart |
| हरष | हर्ष | joy |
| बिसेषी | विशेष; बहुत | especially great |
2 अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।
English explanation
Deeply frightened, they approached Narada, clasped his feet, and spoke in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| नारद | देवर्षि नारद के | of the divine sage Narada |
| पहिं | पास | near; to |
| आए | आए | came |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| पद | चरण | feet |
| आरत | दुखभरे | distressed |
| बचन | वचन | words |
| सुनाए | कहे; सुनाए | spoke; voiced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.139
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 147
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 148
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