बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।
मूल पाठ
हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।
गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।
स्रोत अभिलेख 1.187 · पुस्तक पृ. 188, 189
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं पृथ्वीका सब भार हर लूँगा। हे देववृन्द! तुम निर्भय हो जाओ। आकाशमें ब्रह्म (भगवान्)की वाणीको कानसे सुनकर देवता तुरंत लौट गये। उनका हृदय शीतल हो गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 188 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।
English explanation
I will remove the earth’s entire burden. Be free from fear, O assembly of gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिहउँ | मैं दूर करूँगा | I will remove |
| सकल | सारा | entire |
| भूमि | पृथ्वी का | of the earth |
| गरुआई | भार या बोझ | weight or burden |
| निर्भय | भय से मुक्त | free from fear |
| होहु | हो जाओ | become |
| देव | देवताओं का | of gods |
| समुदाई | हे समुदाय | O assembly |
2 गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।
English explanation
The gods heard the Supreme Being’s voice from the sky and immediately returned, their hearts soothed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गगन | आकाश से | from the sky |
| ब्रह्मबानी | परमात्मा की वाणी | the Supreme Being’s voice |
| सुनी | सुनी | heard |
| काना | कानों से | with their ears |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| फिरे | लौट गए | returned |
| सुर | देवता | the gods |
| हृदय | हृदय | hearts |
| जुड़ाना | शांत और संतुष्ट हुए | became soothed and reassured |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.187
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 188
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 188, 189
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।