बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।
मूल पाठ
हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।
राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।
स्रोत अभिलेख 1.116 · पुस्तक पृ. 128, 129
भावार्थ
मूल पाठ के बादहर्ष, शोक, ज्ञान, अज्ञान, अहंता और अभिमान—ये सब जीवके धर्म हैं। श्रीरामचन्द्रजी तो व्यापक ब्रह्म, परमानन्दस्वरूप, परात्पर प्रभु और पुराणपुरुष हैं। इस बातको सारा जगत् जानता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 129 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।
English explanation
Joy, sorrow, knowledge, ignorance, and the egoistic sense of ‘I am’ are conditions of the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरष | हर्ष | joy |
| बिषाद | शोक; उदासी | sorrow |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| अग्याना | अज्ञान | ignorance |
| जीव | व्यक्तिगत जीव के | of the individual soul |
| धर्म | धर्म; अवस्थाएँ | properties; conditions |
| अहमिति | ‘मैं’ की धारणा | the notion of ‘I’ |
| अभिमाना | अहंभाव; अभिमान | ego-consciousness; pride |
2 राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।
English explanation
Rama is the all-pervading absolute, as the world knows; he is supreme bliss, the supreme Lord, and eternal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | the absolute reality |
| ब्यापक | सर्वत्र व्याप्त | all-pervading |
| जग | जगत | the world |
| जाना | जानता है | knows |
| परमानन्द | परम आनंदस्वरूप | supreme bliss |
| परेस | परमेश्वर | the supreme Lord |
| पुराना | सनातन; आदिकालीन | eternal; primordial |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 129
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 128, 129
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।