बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।
मूल पाठ
राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।
सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।
स्रोत अभिलेख 1.116 · पुस्तक पृ. 128, 129
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी सच्चिदानन्दस्वरूप सूर्य हैं। वहाँ मोहरूपी रात्रिका लवलेश भी नहीं है। वे स्वभावसे ही प्रकाशरूप और [षडैश्वर्ययुक्त] भगवान् हैं, वहाँ तो विज्ञानरूपी प्रात:काल भी नहीं होता। (अज्ञानरूपी रात्रि हो तब तो विज्ञानरूपी प्रात:काल हो; भगवान् तो नित्य ज्ञानस्वरूप हैं।)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 128 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।
English explanation
Rama is the sun of being, consciousness, and bliss; in him there is not the slightest trace of the night of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| सच्चिदानंद | सत्, चित् और आनंदस्वरूप | being, consciousness, and bliss |
| दिनेसा | सूर्य | the sun |
| नहिं | नहीं | not |
| तहँ | वहाँ; राम में | there; in Rama |
| मोह | मोह की | of delusion |
| निसा | रात्रि | night |
| लवलेसा | अत्यंत थोड़ा अंश भी | even the slightest trace |
2 सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।
English explanation
The Lord is intrinsically self-luminous; in him there is no new dawn of knowledge either.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से ही | intrinsically |
| प्रकासरुप | प्रकाशस्वरूप | self-luminous in nature |
| भगवाना | भगवान | the Lord |
| नहिं | नहीं | not |
| तहँ | वहाँ; भगवान में | there; in the Lord |
| पुनि | फिर; भी | then; either |
| बिग्यान | ज्ञान का | of knowledge |
| बिहाना | प्रभात; नया उदय | dawn; fresh arising |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 128
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 128, 129
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।