बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।
मूल पाठ
हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।
पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।
स्रोत अभिलेख 1.248 · पुस्तक पृ. 241, 242
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंने हॢषत होकर नगाड़े बजाये और पुष्प बरसाकर अप्सराएँ गाने लगीं। सीताजीके करकमलोंमें जयमाला सुशोभित है। सब राजा चकित होकर अचानक उनकी ओर देखने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 242 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।
English explanation
The gods joyfully sounded celestial drums; the celestial maidens showered flowers and sang.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| दुंदुभीं | दुंदुभियाँ, बड़े नगाड़े | large ceremonial drums |
| बजाई | बजाईं | sounded |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| प्रसून | फूल | flowers |
| अपछरा | अप्सराओं ने | celestial maidens |
| गाई | गाया | sang |
2 पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।
English explanation
The wedding garland graced Sita's lotus-like hand; she cast a brief glance at all the kings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पानि | हाथ में | in her hand |
| सरोज | कमल जैसे | lotus-like |
| सोह | शोभित थी | looked splendid |
| जयमाला | वर को पहनाने की माला | garland for the chosen bridegroom |
| अवचट | क्षणभर, एकाएक | briefly, suddenly |
| चितए | दृष्टि डाली | glanced at |
| सकल | सभी | all |
| भुआला | राजाओं को | the kings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.248
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 242
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 241, 242
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