बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजी चकित चित्तसे श्रीरामजीको देखने लगीं, तब सब राजालोग मोहके वश हो गये। सीताजीने मुनिके पास [बैठे हुए] दोनों भाइयोंको देखा तो उनके नेत्र अपना खजाना पाकर ललचाकर वहीं (श्रीरामजीमें) जा लगे (स्थिर हो गये)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 242 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।
मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.248 · पुस्तक पृ. 241, 242
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।
English explanation
With an anxious mind, Sita looked for Rama; all the kings were overcome by infatuation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता ने | Sita |
| चकित | व्याकुल, चकित | anxious, startled |
| चित | मन से | in mind |
| रामहि | राम को | Rama |
| चाहा | देखने को खोजा | looked for |
| भए | हो गए | became |
| मोहबस | मोह के अधीन | overcome by infatuation |
| सब | सभी | all |
| नरनाहा | राजा | kings |
2 मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।
English explanation
Sita saw both brothers beside the sage; her eyes grew eager, as though they had found a treasure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि विश्वामित्र के | the sage Vishvamitra |
| समीप | पास | beside |
| देखे | देखा | saw |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों, राम और लक्ष्मण को | brothers, Rama and Lakshmana |
| लगे | लगे, होने लगे | began |
| ललकि | ललकने, उत्सुक होकर उमगने | to yearn eagerly |
| लोचन | नेत्र | her eyes |
| निधि | खजाना | a treasure |
| पाई | पाकर | having found |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.248
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 242
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 241, 242
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