बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।
मूल पाठ
हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।
बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।
स्रोत अभिलेख 1.128 · पुस्तक पृ. 139, 139
भावार्थ
मूल पाठ के बादरमानिवास भगवान् उठकर बड़े आनन्दसे उनसे मिले और ऋषि (नारदजी) के साथ आसनपर बैठ गये। चराचरके स्वामी भगवान् हँसकर बोले—हे मुनि! आज आपने बहुत दिनोंपर दया की॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 139 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।
English explanation
Vishnu, the abode of Lakshmi, rose joyfully and greeted Narada, then sat on a seat with the sage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| मिले | मिले | greeted him |
| उठि | उठकर | having risen |
| रमानिकेता | लक्ष्मी के निवास भगवान विष्णु | Vishnu, the abode of Lakshmi |
| बैठे | बैठे | sat |
| आसन | आसन पर | on a seat |
| रिषिहि | ऋषि नारद के | with the sage Narada |
| समेता | साथ | together |
2 बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।
English explanation
Smiling, the lord of all moving and unmoving beings said, ‘Sage, after many days you have graciously favored me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | कहा | said |
| बिहसि | मुस्कराकर | smiling |
| चराचर | चर और अचर जगत के | of the moving and unmoving world |
| राया | स्वामी | lord |
| बहुते | बहुत | many |
| दिनन | दिनों बाद | after days |
| कीन्हि | की | have shown |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| दाया | दया; कृपा | kindness; favor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 139
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 139
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।