बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रसन्न होकर उन्होंने दोनों भाइयोंको हृदयसे लगा लिया। उनका शरीर पुलकित हो गया और नेत्रोंमें (प्रेमाश्रुओंका) जल भर आया। वे उस जनवासेको चले, जहाँ दशरथजी थे। मानो सरोवर प्यासेकी ओर लक्ष्य करके चला हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 289 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।
चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।
स्रोत अभिलेख 1.307 · पुस्तक पृ. 289, 289
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।
English explanation
Vishvamitra joyfully embraced both brothers; his body thrilled with goosebumps, and tears filled his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| बंधु | भाइयों को | brothers |
| दोउ | दोनों | both |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| लगाए | लगा लिया | embraced |
| पुलक | रोमांच | goosebumps |
| अंग | शरीर में | on his body |
| अंबक | आँखों में | in his eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | भर आए | welled up |
2 चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।
English explanation
They set out for the wedding lodgings where Dasharatha was staying, as though a thirsty person had sighted a lake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| जहाँ | जहाँ | where |
| दसरथु | राजा दशरथ | King Dasharatha, their father |
| जनवासे | बारात के ठहरने के स्थान में | at the wedding party's lodgings |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सरोबर | सरोवर | a lake |
| तकेउ | देख लिया | had sighted |
| पिआसे | प्यासे ने | a thirsty person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.307
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 289
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 289, 289
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।