बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमहाजन प्रसन्न होकर चले और अपने-अपने घर आये। फिर राजाने नौकरोंको बुला भेजा [और उन्हें आज्ञा दी कि] विचित्र मण्डप सजाकर तैयार करो। यह सुनकर वे सब राजाके वचन सिरपर धरकर और सुख पाकर चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 273 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।
रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.287 · पुस्तक पृ. 273, 274
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।
English explanation
They departed happily and reached their respective homes. Then the king summoned and dispatched his attendants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| चले | चले | departed |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| गृह | घर | homes |
| आए | पहुँचे | reached |
| पुनि | फिर | then |
| परिचारक | सेवकों को | attendants |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| पठाए | भेजा | dispatched |
2 रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।
English explanation
“Prepare and arrange a splendid, elaborate pavilion.” The attendants respectfully accepted the command and departed; the final phrase is uncertain, possibly meaning that they departed delighted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रचहु | रचो; सजाओ | construct; arrange |
| बिचित्र | अनोखा और सुंदर | splendid and elaborate |
| बितान | मंडप; वितान | pavilion; canopy |
| बनाई | बनाकर | having prepared |
| सिर | सिर पर | upon their heads |
| धरि | धारण करके; आदर से स्वीकार करके | placing; respectfully accepting |
| बचन | आज्ञा | the command |
| चले | चले | departed |
| सचु | सुख; प्रसन्नता। | Joy; gladness. |
| पाई | पाकर | having obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.287
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 273
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 273, 274
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।