बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।
मूल पाठ
पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।
बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।
स्रोत अभिलेख 1.287 · पुस्तक पृ. 273, 274
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने अनेक कारीगरोंको बुला भेजा, जो मण्डप बनानेमें कुशल और चतुर थे। उन्होंने ब्रह्माकी वन्दना करके कार्य आरम्भ किया और [पहले] सोनेके केलेके खंभे बनाये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 273 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।
English explanation
Those attendants sent for various skilled artisans who were proficient and knowledgeable in the art of constructing pavilions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठए | बुलवा भेजा | sent for |
| बोलि | बुलाने के लिए कहकर | with a summons |
| गुनी | गुणी कारीगरों को | skilled artisans |
| तिन्ह | उन्होंने; उन सेवकों ने | they; those attendants |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| जे | जो | who |
| बितान | मंडप बनाने की | of pavilion construction |
| बिधि | विधि में | in the method |
| कुसल | कुशल | proficient |
| सुजाना | भलीभाँति जानकार | well versed |
2 बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।
English explanation
The artisans began after paying homage to Brahma and fashioned golden pillars resembling banana trunks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधिहि | ब्रह्मा को | to Brahma, the creator |
| बंदि | वंदना करके | having paid homage |
| तिन्ह | उन्होंने; उन कारीगरों ने | they; those artisans |
| कीन्ह | किया | made |
| अरंभा | आरंभ | a beginning |
| बिरचे | रचे; बनाए | fashioned |
| कनक | सोने के | golden |
| कदलि | केले के वृक्ष | banana trees |
| के | के आकार के | in the form of |
| खंभा | खंभे | pillars |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.287
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 273
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 273, 274
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।