बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।
मूल पाठ
स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।
जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 42, 42
भावार्थ
मूल पाठ के बादये सुन्दर गति (मोक्ष) रूपी अमृतके स्वाद और तृप्तिके समान हैं, कच्छप और शेषजीके समान पृथ्वीके धारण करनेवाले हैं, भक्तोंके मनरूपी सुन्दर कमलमें विहार करनेवाले भौंरेके समान हैं और जीभरूपी यशोदाजीके लिये श्रीकृष्ण और बलरामजीके समान (आनन्द देनेवाले) हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 42 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।
English explanation
They are like the taste and satisfaction of the nectar of blessed destiny; like the tortoise and Shesha, they bear the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वाद | स्वाद | taste |
| तोष | तृप्ति | satisfaction |
| सम | के समान | like |
| सुगति | उत्तम गति या मुक्ति | blessed destiny or liberation |
| सुधा | अमृत | nectar |
| के | के | of |
| कमठ | पृथ्वी को सहारा देने वाला कच्छप | the earth-supporting tortoise |
| सेष | पृथ्वीधारक शेषनाग | Shesha, the serpent supporting the earth |
| सम | के समान | like |
| धर | धारण करने वाले | bearers |
| बसुधा | पृथ्वी | the earth |
| के | के | of |
2 जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।
English explanation
They are like bees to the lovely lotus of devotees’ minds, and like Krishna and Balarama to the tongue personified as Yashoda.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | भक्तों का | of devotees |
| मन | मन | mind |
| मंजु | सुंदर | lovely |
| कंज | कमल | lotus |
| मधुकर | भौंरे | bees |
| से | जैसे | like |
| जीह | जीभ | tongue |
| जसोमति | कृष्ण की पालक माता यशोदा | Yashoda, Krishna’s foster mother |
| हरि | भगवान कृष्ण | Lord Krishna |
| हलधर | हल धारण करने वाले बलराम | Balarama, bearer of the plough |
| से | जैसे | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 42
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 42, 42
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।