बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।
मूल पाठ
सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।
खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान्के भक्त जैसे उस चूकको सुधार लेते हैं और दु:ख-दोषोंको मिटाकर निर्मल यश देते हैं, वैसे ही दुष्ट भी कभी-कभी उत्तम सङ्ग पाकर भलाई करते हैं; परन्तु उनका कभी भंग न होनेवाला मलिन स्वभाव नहीं मिटता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 26 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।
English explanation
Devotees of Hari set that lapse right, removing suffering and faults and bestowing unblemished renown.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस चूक को | that lapse |
| सुधारि | सुधारकर | having corrected |
| हरिजन | हरि के भक्त | devotees of Hari |
| जिमि | जिस प्रकार | in the manner that |
| लेहीं | कर लेते हैं | accomplish |
| दलि | मिटाकर | having destroyed |
| दुख | दुःख | suffering |
| दोष | अवगुण | faults |
| बिमल | निर्मल | unblemished |
| जसु | यश | renown |
| देहीं | देते हैं | bestow |
2 खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।
English explanation
Even the wicked do good upon gaining good company, yet their entrenched impure disposition does not disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खलउ | दुष्ट भी | even the wicked |
| करहिं | करते हैं | do |
| भल | भला काम | good deeds |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| सुसंगू | अच्छी संगति | good company |
| मिटइ | मिटता है | disappears |
| न | नहीं | not |
| मलिन | मलिन; दूषित | impure |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| अभंगू | दृढ़; न टूटने वाला | entrenched; unbroken |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 26
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।