बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुनहिं मनु राता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दविधाता जब इस प्रकारका (हंसका-सा) विवेक देते हैं, तब दोषोंको छोड़कर मन गुणोंमें अनुरक्त होता है। काल-स्वभाव और कर्मकी प्रबलतासे भले लोग (साधु) भी मायाके वशमें होकर कभी-कभी भलाईसे चूक जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 26 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुनहिं मनु राता।।
काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुनहिं मनु राता।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: When the Creator grants such discernment, the mind abandons faults and delights in virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| बिबेक | गुण-दोष पहचानने का विवेक | discernment of virtues and faults |
| जब | जब | when |
| देइ | देता है | grants |
| बिधाता | विधाता; सृष्टिकर्ता | the Creator |
| तब | तब | then |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| दोष | अवगुण | faults |
| गुनहिं | गुणों में | in virtues |
| मनु | मन | the mind |
| राता | रम जाता है | becomes absorbed |
2 काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।
English explanation
Under the force of time, disposition, and karma, even good people, subject to their nature, lapse from goodness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | समय या काल | time |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| करम | कर्म | karma; deeds |
| बरिआई | बल से | through the force of |
| भलेउ | भले व्यक्ति भी | even good people |
| प्रकृति | अपनी प्रकृति | their nature |
| बस | के वश में | under the sway of |
| चुकइ | चूक जाते हैं | fall short of |
| भलाई | भलाई | goodness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 26
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।