बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो [वेषधारी] ठग हैं, उन्हें भी अच्छा (साधुका-सा) वेष बनाये देखकर वेषके प्रतापसे जगत् पूजता है; परन्तु एक-न-एक दिन वे चौड़े आ ही जाते हैं, अन्ततक उनका कपट नहीं निभता, जैसे कालनेमि, रावण और राहुका हाल हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 26 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।
उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।
English explanation
Even deceivers of the world, when seen in an impressive guise, are honored through the influence of that guise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | on seeing |
| सुबेष | सुंदर या सज्जन-जैसा वेश | an impressive or virtuous-looking guise |
| जग | संसार को | the world |
| बंचक | ठगने वाले | deceivers |
| जेऊ | जो भी | those who even |
| बेष | वेश का | of the guise |
| प्रताप | प्रभाव | influence |
| पूजिअहिं | पूजे जाते हैं | are honored |
| तेऊ | वे भी | even they |
2 उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।
English explanation
In the end they are exposed; their deception cannot last—as with Kalanemi, Ravana, and Rahu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उधरहिं | उघड़ जाते हैं; भेद खुलता है | are exposed |
| अंत | अंत में | in the end |
| न | नहीं | not |
| होइ | होता है | happens |
| निबाहू | छल का टिके रहना | continuance of the deception |
| कालनेमि | कालनेमि नामक छलकारी राक्षस | Kalanemi, a deceitful demon |
| जिमि | जैसे | as with |
| रावन | रावण, लंका का राक्षसराज | Ravana, demon king of Lanka |
| राहू | राहु, देववेश धारण करने वाला असुर | Rahu, the demon who assumed a divine guise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 26
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।