बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।
मूल पाठ
किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।
हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 26, 27
भावार्थ
मूल पाठ के बादबुरा वेष बना लेनेपर भी साधुका सम्मान ही होता है, जैसे जगत्में जाम्बवान् और हनुमान्जीका हुआ। बुरे संगसे हानि और अच्छे संगसे लाभ होता है, यह बात लोक और वेदमें है और सभी लोग इसको जानते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 26 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।
English explanation
Even in an unattractive outward form, a saintly being is honored, as Jambavan and Hanuman are in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किएहुँ | धारण किए होने पर भी | even when having assumed |
| कुबेष | अनाकर्षक बाहरी रूप | an unattractive outward form |
| साधु | सज्जन; संतस्वभाव व्यक्ति | a saintly being |
| सनमानू | सम्मान | honor |
| जिमि | जैसे | as |
| जग | संसार में | in the world |
| जामवंत | जामवंत, राम के ऋक्ष-सहायक | Jambavan, Rama’s bear ally |
| हनुमानू | हनुमान, राम के वानर भक्त | Hanuman, Rama’s monkey devotee |
2 हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।
English explanation
Bad company brings harm and good company brings benefit; this is known to everyone in worldly tradition and the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हानि | नुकसान | harm |
| कुसंग | बुरी संगति से | from bad company |
| सुसंगति | अच्छी संगति से | from good company |
| लाहू | लाभ | benefit |
| लोकहुँ | लोक-व्यवहार में भी | also in worldly tradition |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | ज्ञात | known |
| सब | सभी | all |
| काहू | को | to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 26
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना · रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 26, 27
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।