बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।
मूल पाठ
सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।
जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।
स्रोत अभिलेख 1.13 · पुस्तक पृ. 34, 35
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह लीला केवल भक्तोंके हितके लिये ही है; क्योंकि भगवान् परम कृपालु हैं और शरणागतके बड़े प्रेमी हैं। जिनकी भक्तोंपर बड़ी ममता और कृपा है, जिन्होंने एक बार जिसपर कृपा कर दी, उसपर फिर कभी क्रोध नहीं किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 34 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।
English explanation
That was solely for the benefit of devotees; he is supremely compassionate and loving toward those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह देहधारण और चरित्र | that embodiment and those deeds |
| केवल | केवल | solely |
| भगतन | भक्तों के | of devotees |
| हित | कल्याण | benefit |
| लागी | के लिए | for the sake of |
| परम | अत्यंत | supremely |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| प्रनत | शरण में आए जनों के प्रति | toward those seeking refuge |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाले | loving |
2 जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।
English explanation
He has tender attachment and deep affection for his devotees—upon whom has he not shown compassion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिन्हें | who has |
| जन | भक्तजन | devotees |
| पर | के प्रति | toward |
| ममता | अपनापन | tender attachment |
| अति | अत्यधिक | deep |
| छोहू | स्नेह | affection |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| करुना | दया | compassion |
| करि | की है | has shown |
| कीन्ह | किया है | has done |
| न | नहीं | not |
| कोहू | किस पर | upon whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 34
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 34, 35
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।