बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।
मूल पाठ
एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।
ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.13 · पुस्तक पृ. 34, 35
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो परमेश्वर एक हैं, जिनके कोई इच्छा नहीं है, जिनका कोई रूप और नाम नहीं है, जो अजन्मा, सच्चिदानन्द और परमधाम हैं और जो सबमें व्यापक एवं विश्वरूप हैं, उन्हीं भगवान्ने दिव्य शरीर धारण करके नाना प्रकारकी लीला की है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 34 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।
English explanation
God is one, desireless, formless, nameless and unborn—the embodiment of being, consciousness and bliss, and the supreme abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक, अद्वितीय | one, without a second |
| अनीह | इच्छा या चेष्टा से रहित | without desire or striving |
| अरूप | रूप से रहित | formless |
| अनामा | नाम से रहित | nameless |
| अज | अजन्मा | unborn |
| सच्चिदानंद | सत्, चित् और आनंद के स्वरूप | being, consciousness and bliss |
| पर | परम | supreme |
| धामा | धाम, आश्रय | abode, refuge |
2 ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।
English explanation
That all-pervading God, whose form is the universe, assumed a body and performed many deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापक | सर्वत्र व्याप्त | all-pervading |
| बिस्वरूप | समस्त विश्व जिनका रूप है | whose form is the universe |
| भगवाना | भगवान | God |
| तेहिं | उन्हीं ने | that very One |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| देह | शरीर | a body |
| चरित | चरित्र, कर्म | deeds |
| कृत | किए | performed |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 34
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 34, 35
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