बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।
मूल पाठ
सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।
तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।
स्रोत अभिलेख 1.13 · पुस्तक पृ. 34, 35
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि प्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी प्रभुताको सब ऐसी (अकथनीय) ही जानते हैं तथापि कहे बिना कोई नहीं रहा। इसमें वेदने ऐसा कारण बताया है कि भजनका प्रभाव बहुत तरहसे कहा गया है। (अर्थात् भगवान्की महिमाका पूरा वर्णन तो कोई कर नहीं सकता; परन्तु जिससे जितना बन पड़े उतना भगवान्का गुणगान करना चाहिये। क्योंकि भगवान्के गुणगानरूपी भजनका प्रभाव बहुत ही अनोखा है, उसका नाना प्रकारसे शास्त्रोंमें वर्णन है। थोड़ा-सा भी भगवान्का भजन मनुष्यको सहज ही भवसागरसे तार देता है)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 34 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: All know that majesty of the Lord; nevertheless, none refrained from speaking of it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| जानत | जानते हैं | know |
| प्रभु | प्रभु की | of the Lord |
| प्रभुता | महिमा और सामर्थ्य | majesty and power |
| सोई | वही | that very |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| कहें | कहे | speaking |
| बिनु | बिना | without |
| रहा | रहा | remained |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई भी | anyone |
2 तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।
English explanation
On this matter, the Veda gives this explanation and describes the power of devotion in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहाँ | उस विषय में | on that matter |
| बेद | वेद ने | the Veda |
| अस | ऐसा | such |
| कारन | कारण | reason |
| राखा | प्रस्तुत किया | set forth |
| भजन | भक्ति-भजन का | of devotional worship |
| प्रभाउ | प्रभाव | power |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| बहु | अनेक | many |
| भाषा | कहा है | has described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 34
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 34, 35
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।