बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे उमापति शिवजी मुझपर प्रसन्न होकर [श्रीरामजीकी] इस कथाको आनन्द और मङ्गलकी मूल (उत्पन्न करनेवाली) बनायेंगे। इस प्रकार पार्वतीजी और शिवजी दोनोंका स्मरण करके और उनका प्रसाद पाकर मैं चावभरे चित्तसे श्रीरामचरित्रका वर्णन करता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 37 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।
सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 37, 38
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।
English explanation
That same Shiva, Uma’s lord, will favor me and make this narrative a source of joy and auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे ही | that same |
| उमेस | उमा के पति शिव | Shiva, Uma’s husband |
| मोहि | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| अनुकूला | अनुकूल होकर | being gracious |
| करिहिं | बनाएँगे | will make |
| कथा | कथा को | the narrative |
| मुद | आनंद | joy |
| मंगल | मंगल | auspiciousness |
| मूला | का मूल या स्रोत | a source of |
2 सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।
English explanation
Remembering Parvati and Shiva and receiving their grace, I recount Rama’s deeds with eagerness in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| सिवा | शिवा, पार्वती | Parvati, Shiva’s consort |
| सिव | शिव | Shiva |
| पाइ | पाकर | having received |
| पसाऊ | कृपा | grace |
| बरनउँ | मैं वर्णन करता हूँ | I recount |
| रामचरित | राम के चरित्र और कर्म | Rama’s life and deeds |
| चित | हृदय में | in the heart |
| चाऊ | उत्साह से | with eagerness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 37
- सहायक विषय
- वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 37, 38
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।