बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।
मूल पाठ
भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।
जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।
होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।
स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 37, 38
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरी कविता श्रीशिवजीकी कृपासे ऐसी सुशोभित होगी, जैसी तारागणोंके सहित चन्द्रमाके साथ रात्रि शोभित होती है। जो इस कथाको प्रेमसहित एवं सावधानीके साथ समझ-बूझकर कहें- सुनेंगे, वे कलियुगके पापोंसे रहित और सुन्दर कल्याणके भागी होकर श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंके प्रेमी बन जायँगे॥ ५-६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 37 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।
English explanation
My poetry shines through Shiva’s grace, like a night made lovely by the moon’s company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भनिति | काव्य-रचना | poetic composition |
| मोरि | मेरी | my |
| सिव | शिव की | Shiva’s |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| बिभाती | शोभित होती है | shines beautifully |
| ससि | चंद्रमा के | of the moon |
| समाज | साथ या संगति में | in the company |
| मिलि | मिलकर | having joined |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सुराती | सुंदर रात्रि | a lovely night |
2 जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।
English explanation
Those who tell and hear this narrative with love, understanding, and an attentive mind—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| एहि | इस | this |
| कथहि | कथा को | narrative |
| सनेह | प्रेम | love |
| समेता | सहित | with |
| कहिहहिं | कहेंगे | will tell |
| सुनिहहिं | सुनेंगे | will hear |
| समुझि | समझकर | with understanding |
| सचेता | सावधान चित्त से | attentively |
3 होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।
English explanation
They will become devoted to Rama’s feet, free from the impurities of Kali’s age, and recipients of great auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहहिं | होंगे | will become |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | to the feet |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाले | lovingly devoted |
| कलि | कलियुग के | of Kali’s age |
| मल | मल या दोषों से | from impurities |
| रहित | रहित | free |
| सुमंगल | उत्तम मंगल के | of great auspiciousness |
| भागी | भागी | recipients |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 37
- सहायक विषय
- वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 37, 38
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।