बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपार्वतीजीके घर आ जानेसे पर्वत ऐसा शोभायमान हो रहा है जैसा रामभक्तिको पाकर भक्त शोभायमान होता है। उस (पर्वतराज) के घर नित्य नये-नये मङ्गलोत्सव होते हैं, जिसका ब्रह्मादि यश गाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 84 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।
नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।
स्रोत अभिलेख 1.66 · पुस्तक पृ. 84, 85
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।
English explanation
With Girija’s arrival in his home, the mountain shines as a person does upon attaining devotion to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोह | शोभित होता है | shines; appears splendid |
| सैल | पर्वत हिमालय | the Himalayan mountain |
| गिरिजा | पर्वत की पुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain |
| गृह | घर में | at home |
| आएँ | आने से | upon arriving |
| जिमि | जैसे | just as |
| जनु | मनुष्य | a person |
| रामभगति | राम के प्रति भक्ति | devotion to Rama |
| के | के | of; linking attainment to devotion |
| पाएँ | प्राप्त करने से | upon attaining |
2 नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।
English explanation
Fresh auspicious events occur daily in his home; Brahma and others sing his praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नूतन | नए | new; fresh |
| मंगल | शुभ उत्सव या घटनाएँ | auspicious celebrations or events |
| गृह | घर में | in the home |
| तासू | उनके, हिमालय के | his, the mountain’s |
| ब्रह्मादिक | ब्रह्मा आदि देवता | Brahma and other deities |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| जसु | यश | praise; glory |
| जासू | जिनका | whose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 84
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 84, 85
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।