बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।
मूल पाठ
सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।
सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।
स्रोत अभिलेख 1.66 · पुस्तक पृ. 84, 85
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारी नदियोंमें पवित्र जल बहता है और पक्षी, पशु, भ्रमर सभी सुखी रहते हैं। सब जीवोंने अपना स्वाभाविक वैर छोड़ दिया और पर्वतपर सभी परस्पर प्रेम करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 84 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।
English explanation
AI draft: All rivers flow with pure water. Birds, animals, and bees all live happily.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| सब | सभी | all |
| पुनित | पवित्र | pure |
| जलु | जल | water |
| बहहीं | बहती हैं | flow |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| मधुप | भौंरे | bees |
| सुखी | सुखी | happy |
| सब | सभी | all |
| रहहीं | रहते हैं | live; remain |
2 सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।
English explanation
All creatures have abandoned their natural enmity; all cherish affection for the mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वाभाविक | natural; innate |
| बयरु | वैर | enmity |
| सब | सभी | all |
| जीवन्ह | जीवों ने | creatures, as the agents |
| त्यागा | त्याग दिया | abandoned |
| गिरि | पर्वत हिमालय | the Himalayan mountain |
| पर | के प्रति | toward; for |
| सकल | सभी | all |
| करहिं | करते हैं | show; feel |
| अनुरागा | प्रेम | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 84
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 84, 85
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।