बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[सब जगह] वही रघुनाथजी, वही लक्ष्मण और वही सीताजी—सती ऐसा देखकर बहुत ही डर गयीं। उनका हृदय काँपने लगा और देहकी सारी सुध-बुध जाती रही। वे आँख मूँदकर मार्गमें बैठ गयीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 76 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।
हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.55 · पुस्तक पृ. 76, 76
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।
English explanation
Seeing the same Rama, the same Lakshmana, and Sita everywhere, Sati became deeply frightened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | the very same |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of the Raghu lineage |
| सोइ | वही | the very same |
| लछिमनु | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva’s wife |
| अति | अत्यंत | extremely |
| भई | हो गईं | became |
| सभीता | भयभीत | frightened |
2 हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।
English explanation
Her heart trembled, and she had no awareness of her body. Closing her eyes, she sat down on the path.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदय | हृदय | heart |
| कंप | काँपना | trembling |
| तन | शरीर की | of the body |
| सुधि | सुध या चेतना | awareness |
| कछु | कुछ भी | any at all |
| नाहीं | नहीं थी | there was none |
| नयन | आँखें | eyes |
| मूदि | बंद करके | having closed |
| बैठीं | बैठ गईं | sat down |
| मग | मार्ग | the path |
| माहीं | में | on |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 76
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 76, 76
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।