बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।
मूल पाठ
बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।
पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.55 · पुस्तक पृ. 76, 76
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर आँख खोलकर देखा, तो वहाँ दक्षकुमारी (सतीजी) को कुछ भी न दीख पड़ा। तब वे बार-बार श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें सिर नवाकर वहाँ चलीं जहाँ श्रीशिवजी थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 76 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।
English explanation
Then Sati opened her eyes and looked again, but Daksha’s daughter saw nothing there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | again |
| बिलोकेउ | देखा | looked |
| नयन | आँखें | eyes |
| उघारी | खोलकर | having opened |
| कछु | कुछ भी | anything |
| न | नहीं | not |
| दीख | दिखाई दिया | was visible |
| तहँ | वहाँ | there |
| दच्छकुमारी | दक्ष की पुत्री सती को | to Sati, Daksha’s daughter |
2 पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।
English explanation
Repeatedly bowing her head at Rama’s feet, Sati went to where Shiva was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सीसा | सिर | head |
| चलीं | चलीं | went |
| तहाँ | वहाँ | there |
| जहँ | जहाँ | where |
| रहे | थे | was |
| गिरीसा | शिव, कैलास के स्वामी | Shiva, lord of Mount Kailasa |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 76
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 76, 76
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