बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।
मूल पाठ
सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।
त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।
स्रोत अभिलेख 1.25 · पुस्तक पृ. 243, 244
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसी शिवजीके कठोर धनुषको आज इस राजसमाजमें जो भी तोड़ेगा, तीनों लोकोंकी विजयके साथ ही उसको जानकीजी बिना किसी विचारके हठपूर्वक वरण करेंगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 243 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।
English explanation
Whoever today breaks that very rigid bow of Shiva in the assembly of kings—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very |
| पुरारि | त्रिपुर के शत्रु शिव का | of Shiva, destroyer of Tripura |
| कोदंडु | धनुष | bow |
| कठोरा | कठोर | rigid |
| राज | राजाओं की | of kings |
| समाज | सभा में | in the assembly |
| आजु | आज | today |
| जोइ | जो कोई | whoever |
| तोरा | तोड़ेगा | breaks |
2 त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।
English explanation
Along with victory over the three worlds, he will win Vaidehi; without further deliberation, she will resolutely choose that very man as her husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिभुवन | तीनों लोकों की | of the three worlds |
| जय | विजय | victory |
| समेत | सहित | together with |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| बिनहिं | बिना ही | without |
| बिचार | विचार किए | deliberation |
| बरइ | पति के रूप में चुनेंगी | will choose as husband |
| हठि | दृढ़ निश्चय से | resolutely |
| तेही | उसी को | that very man |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 243
- सहायक विषय
- बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 243, 244
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।