बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रण सुनकर सब राजा ललचा उठे। जो वीरताके अभिमानी थे, वे मनमें बहुत ही तमतमाये। कमर कसकर अकुलाकर उठे और अपने इष्टदेवोंको सिर नवाकर चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 243 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।
परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।
स्रोत अभिलेख 1.25 · पुस्तक पृ. 243, 244
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।
English explanation
Hearing the pledge, all the kings became eager to fulfill it; those proud of their prowess grew intensely stirred within.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पन | प्रतिज्ञा, शर्त | pledge, condition |
| सकल | सभी | all |
| भूप | राजा | kings |
| अभिलाषे | अभिलाषी हुए | became eager |
| भटमानी | अपनी वीरता का अभिमान रखने वाले | those proud of their prowess |
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| मन | मन में | within their minds |
| माखे | उत्तेजित हो उठे | grew heated and stirred |
2 परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।
English explanation
Girding themselves, they rose eagerly and advanced after bowing their heads to their chosen deities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिकर | कमर का बंध, फेंटा | waistband, girdle |
| बाँधि | बाँधकर | having tied |
| उठे | उठे | rose |
| अकुलाई | उतावले होकर | eagerly, impatiently |
| चले | आगे चले | advanced |
| इष्टदेवन्ह | अपने इष्टदेवों को | to their chosen deities |
| सिर | सिर | their heads |
| नाई | नवाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 243
- सहायक विषय
- बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 243, 244
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।